Shadow

निर्भया केस: कल सुबह 5:30 बजे दुष्कर्मियों की फांसी तय, मौत से एक दिन पहले दरिंदों की 5 याचिकाएं खारिज

nirbhaya_case-verdict-2020

नई दिल्ली | निर्भया को न्याय मिलते-मिलते आखिरकार न्याय मिल ही गया। उसके चारों दुष्कर्मियों- मुकेश सिंह, पवन गुप्ता, विनय शर्मा और अक्षय ठाकुर ने मौत से एक दिन पहले तक बचने के लिए सारी तिकड़में लगा दीं, लेकिन कोर्ट ने उनकी फांसी नहीं टाली। गुरुवार को एक ही दिन में दोषियों की 5 याचिकाएं खारिज हो गईं।

पवन-अक्षय ने दूसरी बार दया याचिका भेजी, वो भी खारिज हो गई। मुकेश ने वारदात वाले दिन दिल्ली में नहीं होने का दावा किया था, वो भी सुप्रीम कोर्ट ने खारिज कर दिया। फांसी पर रोक लगाने के लिए भी याचिका लगाई थी, लेकिन पटियाला हाउस कोर्ट ने इसे भी नहीं माना। अब शुक्रवार सुबह 5:30 बजे चारों दुष्कर्मियों को तिहाड़ की जेल नंबर-3 में फांसी मिल जाएगी।

तलाक की अर्जी भी लगाई थी, लेकिन फांसी नहीं रोक सके

फांसी रोकने के लिए दोषी अक्षय की पत्नी पुनीता ने 18 मार्च को औरंगाबाद की एक कोर्ट में तलाक की अर्जी भी लगाई थी। उसने दलील दी थी कि वो विधवा की तरह नहीं जीना चाहती। लेकिन उसके बाद भी दोषियों की फांसी नहीं रुक सकी। इसका कारण था कि तलाक सिविल मामलों में आता है और फांसी क्रिमिनल मामलों में। और क्रिमिनल मामलों पर सिविल मामले असर नहीं डालते।

लेकिन दोषियों के वकील कहते रहे- पुनीता (आरोपी अक्षय की पत्नी) को न्याय मिलना चाहिए

बार-बार फांसी टलवा रहे दोषियों के वकील एपी सिंह को जब इस बार फांसी टलवाने का कोई कारण नहीं मिला, तो उन्होंने कहा कि उसे (अक्षय की पत्नी) न्याय मिलना चाहिए। एपी सिंह ने  दलील दी कि “वो (अक्षय की पत्नी) पीड़िता है। उसका अधिकार है। अगर उसको (अक्षय) फांसी दे दोगे, तो उसकी पत्नी के अधिकारों का क्या होगा? वो तो विधवा हो जाएगी। वो तो जवान लड़की थी। उसकी एक साल पहले ही शादी हुई थी और दो महीने का बच्चा था। तबसे अक्षय जेल में है।’ एपी सिंह ने ये भी बताया था कि दोषियों की जितनी भी लीगल रेमेडिज बाकी थी, वो सब लगा दी थी।

दोषियों की फांसी नहीं टल सकी, उसके दो कारण

1) 14 दिन का समय खत्म : सुप्रीम कोर्ट की गाइडलाइन कहती है कि डेथ वॉरंट और फांसी की तारीख में 14 दिन का अंतर होना चाहिए। दोषियों का डेथ वॉरंट 5 मार्च को जारी हुआ था।
2) सारे कानूनी रास्ते भी खत्म : फांसी की सजा में दोषी को सारे कानूनी रास्ते इस्तेमाल करने का अधिकार होता है और चारों दोषियों ने अपने सारे कानूनी अधिकार इस्तेमाल भी कर लिए हैं। चारों की रिव्यू पिटीशन, क्यूरेटिव पिटीशन और दया याचिका भी खारिज हो चुकी है।

RO-11243/71

Leave a Reply