Shadow

रायपुर : सोशल डिस्टन्सिंग का पालन करते हुए मनरेगा कार्यों को दिए प्राथमिकता : जिले में 06 करोड़ 85 लाख की मजदूरी राशि वितरण

रायपुर. महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना ग्रामीण अर्थव्यवस्था के आधारभूत संगठको में से एक महत्वपूर्ण घटक है। लॉक डाउन की स्थिति में ग्रामीण परिवारों को रोजगार उपलब्ध कराना बड़ी चुनोती थी। जिले में भारत सरकार के निर्देशानुसार महात्मा गांधी नरेगा योजनान्तर्गत जल संरक्षण के कार्यो को प्राथमिकता से लिया गया है। उसी का नतीजा रहा कि  कार्य स्थल पर सार्वजनिक दूरी का पालन करते हुए जिले में 4344 ग्रामीण परिवारों को  रोजगार उपलब्ध कराया जा सका। लॉक डाउन के दौरान जिले के महात्मा गांधी नरेगा मजदूरों को  6 करोड़ से अधिक की मजदूरी भुगतान की गई है। इन सभी कारणों से बीजापुर जिले के ग्रामीण क्षेत्रों में अर्थ संकट की स्थिति निर्मित नहीं हुई।

कोरोना वायरस के चलते भारत सरकार ने महात्मा गांघी नरेगा के कार्य स्थल पर सार्वजिक दूरी का पालन करने के साथ मजदूरों को फेस मास्क व हाथ सफाई के लिए सेनिटाइजर की व्यवस्था का कड़ाई से पालन के निर्देश दिए गए हैं।  बीजापुर जिले में भारत सरकार के निर्देशों  का कड़ाई से पालन किये जाने के लिए कलेक्टर के.डी. कुंजाम द्वारा जिले के सरपंच , सचिव और रोजगार सहायक को पत्र लिखकर कड़ाई से पालन करने को कहा गया है। मुख्य कार्यपालन अधिकारी जिला पंचायत पोषण चंद्राकर ने बताया कि पूर्व में ही जिले में जल संरक्षण कार्यो जैसे नहर लाइनिग, बोल्डर चेक डेम , तालाब , डबरी आदि निर्माण कार्यो को प्राथमिकता से योजनान्तर्गत स्वीकृत किये गए थे। जिसके कारण ही लॉक डाउन के दौरान भी सार्वजनिक दूरी का पालन करते हुए आवश्यक व्यवस्था के साथ  कार्य उपलब्ध कराए जाने में आसानी हुई है।

जिले में महात्मा गांधी नरेगा योजनान्तर्गत प्राप्त आकड़ो के अनुसार कार्यरत मजदूरों को 20 मार्च अर्थात लॉक डाउन के बाद 6 करोड़ 85 लाख  की मजदूरी राशि वितरण किया गया है, जो मजदूरों को प्रदाय किया जा रहा है। कोरोना वायरस के चलते देश में लॉक डाउन की स्थिति निर्मित हुई। जिसके चलते जिले में महात्मा गांधी नरेगा योजना में कार्यरत मजदूर मजदूरी भुगतान को लेकर चिंतित थे। शासन की भी मंशा रही कि किसी भी स्थिति में इस दौरान ग्रामीण क्षेत्रो में भूखमरी और ग्रामीणों को अर्थ की समस्या उत्पन्न नहीं होनी चाहिए। बीजापुर जिले में अपेक्षाकृत बैंकिंग सुविधाओ का अभाव है, जिसके कारण भारत सरकार ने जिले को नकद मजदूरी भुगतान की अनुमति प्रदान की है।

लॉक डाउन के दौरान राशि बैंको से हस्तांतरण कर मजदूरों तक पहुंचाना एक बड़ी चुनोती थी। इसके लिए कलेक्टर श्री के.डी. कुंजाम के मार्गदर्शन में जिले में मौजूद बैंक शाखा  प्रभारी से समन्वय कर योजना की राशि आहरण को प्राथमिकता देते हुए ग्राम पंचायतों को भुगतान करने को कहा गया। जिसके कारण ही योजनांतर्गत कार्यरत मजदूरों को अर्थ की समस्या ना हो। लॉक डाउन के दौरान जिले में योजनांतर्गत 3 लाख 62 मानव दिवस सृजित किये गए हैं, 2189 परिवारों को पिछले वित्तीय वर्ष में 100 दिवस से अधिक का कार्य दिया गया है।

RO-11274/73

Leave a Reply