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लापरवाही के करना बारिश से ख़राब हुआ सैकड़ों क्विंटल धान, संग्रहण केंद्रों में 175 करोड़ का धान सुरक्षित नहीं

जगदलपुर. बस्तर जिले में स्थानीय धान के साथ दंतेवाड़ा, बीजापुर के धान को सुरक्षित रखने मार्कफेड के अधिकारियों ने पहली बार 3 जगहों पर संग्रहण केंद्र बनाकर 175 करोड़ का धान रखवा दिया पर इसकी सुरक्षा के लिए कोई उपाय नहीं कर सके।

अधिकारियों का दावा है कि धान को सुरक्षित रखने के लिए उन्होंने दो कैप कवर लगाए हैं, जब मंगलवार को बस्तर ब्लॉक में बनाए गए संग्रहण केंद्र की पड़ताल की गई तो पाया गया कि यहां करीब 100 से अधिक बोरे में धान अंकुरित हो गया है वहीं कई क्विंटल धान बारिश में भीग जाने के चलते काला पड़ गया है। जांच में कलेक्टर या अन्य अधिकारी
डीएमओ व संग्रहण केंद्र प्रभारी की लापरवाही को नहीं पकड़ पाए। इसलिए काले पड़ गए धान और खराब बारदाने को यहां पर छुपाने के साथ ही यहां से हटाया जा रहा था।

जीरो वेस्टेज पर खरीदी की योजना सफल नहीं
जिला सहकारी केंद्रीय बैंक और डीएमओ ने इस साल धान खरीदी जीरो वेस्टेज के आधार पर होने की योजना बनाई थी। लेकिन समय पर धान का उठाव नहीं होने के चलते दोनों विभाग की यह योजना कामयाब नहीं हो पाई। इधर कुछ धान खरीदी केंद्र के प्रभारियों ने बताया कि आनन-फानन में जिम्मेदारी का पालन करते हुए मार्कफेड के अधिकारियों ने संग्रहण केंद्र में धान को रखवाया जिसके चलते ही बड़े पैमाने पर धान का नुकसान हुआ।

फटे तिरपाल से ढका है 50 हजार क्विंटल धान
बस्तर ब्लॉक मुख्यालय के संग्रहण केंद्र में करीब 50 हजार क्विंटल से ज्यादा धान फटे कैप के सहारे रखा गया है। इधर इस समय बस्तर जिले में छोटे देवड़ा, बिरिंगपाल और बस्तर ब्लॉक मुख्यालय में बनाए गए संग्रहण केंद्र में 7 लाख क्विंटल से ज्यादा धान रखा गया है जिसकी कीमत करीब 175 करोड़ रुपए है। डीएमओ एसके गुप्ता का कहना है किसी भी संग्रहण केंद्र में रखा धान बारिश के चलते न तो भीगा है और न ही खराब हुआ है।

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