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डॉ. प्रेमसाय सिंह टेकाम : स्वस्थ मन और स्वस्थ शरीर का होना आवश्यक, छात्रावास-आश्रमों के सभी बच्चों का होगा स्वास्थ्य परीक्षण

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प्रदेश के आदिम जाति तथा अनुसूचित जाति विकास मंत्री डॉ. प्रेमसाय सिंह टेकाम ने कहा है कि स्वस्थ मन और स्वस्थ शरीर का होना आवश्यक है। कोविड-19 के संक्रमण से बचाव के लिए छात्रावास-आश्रमों के सभी बच्चों का स्वास्थ्य परीक्षण किया जाएगा। उन्होंने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से विभाग द्वारा संचालित छात्रावास-आश्रमों के अधीक्षकों के प्रशिक्षण कार्यशाला में उपरोक्त बातें कहीं। डॉ. टेकाम ने कहा कि कोरोना संक्रमण से बचाव के लिए जरूरी है कि छात्रावास-आश्रमों में कार्य करने वाले कर्मचारी मास्क, सेनेटाईजर और ग्लब्स का उपयोग करें। छात्रावास-आश्रमों में साफ-सफाई और सेनेटाईजेशन की कार्यवाही समय पूर्व कर ली जाए। उन्होंने कहा कि विभाग द्वारा संचालित छात्रावास-आश्रमों को क्वारेंटाईन सेंटर भी बनाया गया है। इन केन्द्रों में सेनेटाईजेशन की कार्यवाही भवन केन्द्रों के अंदर और बाहर नियमानुसार की जाए।

डॉ.टेकाम ने कहा कि उत्कृष्ट कार्य करने वाले छात्रावास-आश्रमों को पुरस्कृत किया जाएगा। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री श्री भूपेश बघेल की मंशा अनुरूप प्रत्येक जिले में दो-दो आश्रम और छात्रावासों को आधुनिक सुविधाओं से लैस कर उन्हें उत्कृष्ट केन्द्रों के रूप में विकसित किया जाना है। इसके लिए बस्तर संभाग के प्रत्येक जिले में 10-10 सहित कुल 70, सरगुजा-गरियाबंद-धमतरी में 5-5 आदर्श केन्द्र और शेष बाकि जिलों में 2 विभाग द्वारा और 2 विधायक द्वारा गोद लिए गए दो केन्द्रों को उत्कृष्ट केन्द्रों के रूप में विकसित किया जाना है। डॉ. टेकाम ने कहा कि प्रदेश में वर्तमान में 3 हजार 278 छात्रावास-आश्रमों संचालित हैं, जिनमें लगभग 2 लाख बच्चे रहते हैं। उन्होंने कहा कि छात्रावास-आश्रमों में रहने वाले बच्चों को पढ़ाई-लिखाई का अच्छा वातावरण प्रदान करना अधीक्षकों की जवाबदारी है।

अधीक्षक यह प्रयास करें कि छात्रावास-आश्रमों में रहने वाले बच्चे अच्छे से पढ़े ताकि वे बेहतर कैरियर का निर्माण कर सके। छात्रावास-आश्रमों में शुद्ध पेयजल के लिए आरओ वाटर यूनिट की व्यवस्था के साथ किचन की साफ-सफाई और खाद्यान्न सामग्री को सुरक्षित रखने की व्यवस्था सुनिश्चित की जाए। सभी केन्द्रों की रंगाई पोताई की जाए और वहां व्यवस्थित पुस्तकालय की स्थापना की जाए। केरियर कॉउंसिंलिंग के लिए पुस्तकालय में समाचार पत्र-पत्रिकाएं भी उपलब्ध रहें। डॉ. टेकाम ने कहा कि बच्चों की पढ़ाई के लिए सुबह का वातावरण सबसे अच्छा होता है। अधीक्षक पालक के रूप में बच्चों की देखभाल करें। जहां छात्रावास-आश्रमों में स्थान रिक्त हैं वहां मुख्यमंत्री के निर्देशानुसार बाड़ी विकास के कार्य किए जाएं। आश्रम-छात्रावासों का ऐसा वातावरण बनाएं जहां जाने की इच्छा हो। बच्चों की मानसिकता के आधार पर विषय का चयन कर केरियर कॉउंसिंलिंग प्रदान किया जाए। स्थानीय बोली के माध्यम से बच्चों में राष्ट्रीयता की भावना विकसित की जाए। उन्होंने कहा कि छात्रावास-आश्रमों का वातावारण बेहतर बनाने में अधीक्षकों की भूमिका महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा कि प्रशिक्षण का आयोजन छात्रावास-आश्रमों को बेहतर बनाने के लिए किया गया है, इसका लाभ बच्चों को मिलेगा।

सचिव आदिम जाति तथा अनुसूचित विकास विभाग श्री डी.डी. सिंह ने कहा कि कोरोना संक्रमण से बचाव के लिए छात्रावास-आश्रमों में की जाने वाली कार्यवाही के लिए विभाग द्वारा एसओपी बनाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री के निर्देशानुसार छात्रावास-आश्रमों को बेहतर बनाने में प्रतिस्पर्धा हो और वे आकर्षण का केन्द्र बनें। दैनिक उपयोग की आपूर्ति के लिए महिला स्व-सहायता समूह द्वारा ही आपूर्ति की जानी है। उन्होंने कहा कि छात्रावास-आश्रमों में प्रयोग की जाने वाली सामाग्रियों के लिए एक साल में लगभग 100 करोड़ रूपए की सामग्रियों की आपूर्ति महिला स्व सहायता समूहों द्वारा की जा सकती हैं। इन सामग्रियों की गुणवत्ता से कोई समझौता न करें। मुख्यमंत्री के निर्देशानुसार आवश्यकतानुसार सब्जी की आपूर्ति छात्रावास-आश्रम के आसपास वाले किसानों से एग्रीमेंट करके भी की जा सकती है।

उन्होंने बताया कि प्रदेश में 1248 आश्रम संचालित हैं, यहां दुग्ध महासंघ आपूर्ति करने के लिए सहमत है। आश्रम में रहने वाले बच्चों के लिउ दुध पाउडर के रूप में हर माह लिया जा सकता है। श्री डी.डी. सिंह ने कहा कि इसके लिए जिलों के सहायक आयुक्त अपनी आवश्यकता की जानकारी विभाग को भेज दें। निर्धारित मापदण्डों में सुधार के कारण और अपव्यय को रोकने के उपाय भी बताएं। एकलव्य और प्रयास विद्यालयों में आश्रम और छात्रावास के बच्चों का प्रवेश हो, इसका प्रयास करें। उन्होंने कहा कि छात्रावास-आश्रमों में गद्दों, चादर के साथ-साथ बाथरूम में पानी और साफ-सफाई की व्यवस्था सुनिश्चित की जाए। छात्रावास-आश्रम के चतुर्थ श्रेणी कर्मी को भी प्रशिक्षण दिया जाएगा।

विभाग की संचालक श्रीमती शम्मी आबिदी ने कहा कि कोरोना संक्रमण का प्रभाव बच्चों पर न पड़े समय रहते सभी आवश्यक तैयारियां कर ली जाएं। क्वारेंटाईन सेंटर पूर्ण तरह से सेनेटाईज करने के लिए स्वास्थ्य विभाग और स्थानीय निकाय का सहयोग लिया जाए। इसी प्रकार कर्मचारियों की सुरक्षा भी जरूरी है। उन्होंने कहा कि प्रदेश के मुख्यमंत्री का मानना है कि छात्रावास-आश्रम के अधीक्षक काफी प्रतिभावान है और यहां नवाचार भी कर रहे हैं। प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी और केरियर गाइडेंस के लिए बच्चों को एक्स्ट्रा कैरिकुलम एक्टीविटी और क्वीज प्रतियोगिता करा सकते हैं। महिला स्व सहायता समूहों को छात्रावास-आश्रम से जोड़ा जाए। स्वास्थ्य परीक्षण का कार्य सर्तकता से करें। बच्चों के स्वास्थ्य के प्रति जागरूक रहना है। बच्चों में इम्यूनिटी सिस्टम को बढ़ाने के लिए स्वास्थ्यवर्धक भोजन दिया जाए। छात्रावास-आश्रम में सभी प्रकार की पंजीयनों का संधारण प्रारंभ से हो और सहायक आयुक्त समय-समय पर इसका निरीक्षण सुनिश्चित करें। स्वास्थ्य सुरक्षा के लिए व्यापक प्रचार-प्रसार किया जाए।

प्रशिक्षण में कहा गया कि कोविड-19 के संक्रमण से बचाव के लिए गाईडलाईन का पूर्णतः पालन किया जाए। बच्चों को गर्म भोजन दिया जाए। छात्रावास-आश्रम सोशल डिस्टेंसिंग का पालन सुनिश्चित किया जाए। छात्रावास-आश्रम में बेहतर प्रबंधन के लिए परीक्षा परिणाम अच्छा रखें। प्रशिक्षण में छात्रावास आश्रमों के रख-रखाव और कर्मचारियों की सुरक्षा, आगामी सत्र में विद्यार्थियों के प्रवेश, नवाचार, स्वास्थ्य संबंधी जागरूकता एवं स्वस्थ्य जीवन के लिए दिशा-निर्देश का पालन, विद्यार्थियों के स्वास्थ्य के लिए व्यायाम और योगाभ्यास, विद्यार्थियों के अध्ययन की मॉनिटरिंग और मूल्यांकन, पालन एवं निगरानी समितियों का गठन एवं भूमिका, विद्यार्थियों को स्व-अनुशासन के कार्य हेतु प्रेरित करना, छात्रावास-आश्रमों की दैनंदिन समय-सारिणी, स्वादिष्ट एवं पौष्टिक भोजन के मैन्यू का निर्धारण, अभिलेखों के संधारण के संबंध में चर्चा की गई। इस अवसर पर उपायुक्त श्री संजय गौड़, श्री के.आर. परस्ते, सहायक संचालक श्री अरविन्द जायसवाल, प्राचार्य प्रयास कन्या छात्रावास परिसर रायपुर श्रीमती मंजूला तिवारी, प्रशिक्षक श्री बी.आर. साहू भी उपस्थित थे।

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