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रायपुर : मुख्यमंत्री ने आंगनबाड़ी के बच्चों के समग्र विकास के लिए ‘चकमक अभियान‘ और ‘सजग कार्यक्रम‘ की वेब लाॅन्चिंग की

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रायपुर. मुख्यमंत्री श्री भूपेश बघेल ने आज आंगनबाड़ी के बच्चों के समग्र विकास के लिए महिला बाल विकास विभाग द्वारा यूनिसेफ के सहयोग से तैयार किए गए ‘चकमक अभियान‘ और ‘सजग कार्यक्रम‘ का शुभारंभ किया। बच्चों के रचनात्मक विकास के लिए ’चकमक अभियान’ के तहत लाॅकडाउन के समय जब आंगनबाड़ी बंद है बच्चों को घरों में ही पारिवारिक सदस्यों के साथ दादा-दादी, नाना-नानी के साथ रचनात्मक गतिविधियों में व्यस्त रख कर सिखाने की पहल की जाएगी।

बच्चों के लिए गोंड़ी में ‘मोद्दोल डाका‘ और हल्बी में पहिल डांहका अर्थात पहला कदम पुस्तिका का विमोचन

पारिवारिक सदस्यों को बच्चों के साथ आनंदपूर्ण गतिविधियां करायी जाएगी। इसके साथ ही बच्चों के स्वास्थ्य, पोषण और समग्र विकास की प्रक्रिया को घर तक बढ़ावा देने के उद्देश्य से यूनिसेफ के तकनीकी सहयोग से तैयार किए गए ’सजग कार्यक्रम’ की शुरूआत की गई। इस दौरान मुख्यमंत्री ने हल्बी एवं गोंडी बोली में दो पुस्तिका ’मोद््दोल डाका’ और ’पहिल डांहका’ और छत्तीसगढ़ की स्थानीय बोलियों के विकासखंडवार नक्शा का विमोचन भी किया। गोंडी बोली में मोद््दोल डाका एवं हल्बी बोली में पहिल डांहका का अर्थ ’पहला कदम’ होता है।


चकमक‘ अभियान में बच्चे परिवारिक सदस्यों के साथ सीखेंगे रचनात्मक गतिविधियां

इस अवसर पर महिला बाल विकास मंत्री श्रीमती अनिला भेंड़िया, महिला बाल विकास विभाग के सचिव श्री सिद्धार्थ कोमल सिंह परदेशी, संचालक श्री जन्मेजय महोबे, यूनिसेफ फील्ड आॅफिस प्रमुख श्री जोब जकारिया उपस्थित थे। यूनिसेफ की भारत की प्रमुख सुश्री यास्मिन अली हक वीडियो काॅन्फ्रेंसिंग के माध्यम से इस कार्यक्रम में शामिल हुई।

‘सजग‘ कार्यक्रम से बच्चों के स्वास्थ्य, पोषण और समग्र विकास की प्रक्रिया को मिलेगा बढ़ावा

मुख्यमंत्री श्री भूपेश बघेल ने इस अवसर पर महिला एवं बाल विकास मंत्री श्रीमती अनिला भेंड़िया सहित विभागीय अधिकारियों-कर्मचारियों और यूनिसेफ के प्रतिनिधियों को ‘चकमक‘ और ‘सजग‘ कार्यक्रमों के शुभारंभ के अवसर पर बधाई देते हुए कहा कि लाॅकडाउन के दौरान अभिभावक और बच्चे घरों पर हैं। कोविड-19 से सुरक्षित रहने का सबसे अच्छा उपाय घरों में ही रहना है। ऐसे समय में इन दोनों कार्यक्रमों से बच्चों को रचनात्मक गतिविधियों में व्यस्त रखकर उन्हें परिस्थितियों में ढालने और संभालने में मदद मिलेगी और बच्चों के समय का सदुपयोग हो सकेगा और वे अच्छी बाते सीख सकेंगे।

सोशल मीडिया प्लेटफाॅर्म पर बच्चों के अभिभावकों को भेजे जाएंगे टास्क-दिशा निर्देश

मुख्यमंत्री ने दंतेवाड़ा के बिंजाम गांव के दो बच्चों लिपिका और कविता अनुसुईया तथा उनके पालकों श्रीमती ललिता नेताम और श्रीमती राजो बाई नेताम से वीडियो काॅन्फ्रेंसिंग से बात भी की। मुख्यमंत्री ने श्रीमती ललिता से पोषण आहार वितरण और रेडी-टू-ईट की सामग्री वितरण के संबंध में पूछा- श्रीमती ललिता ने बताया कि उन्हें सामग्री मिल गई है। उन्होंने कहा कि बच्चों के साथ समय बिताना अच्छा लग रहा है। बच्चों ने वीडियो काॅन्फ्रेंसिंग में खेल गतिविधियां भी करके दिखाई। रस्सी से बने गोले को बच्चों ने कूद कर पार किए और रस्सी पर चलकर दिखाया। मुख्यमंत्री सहित उपस्थित सभी लोगों ने तालियां बजाकर उन्हें प्रोत्साहित किया। इसी तरह मुख्यमंत्री ने पुरानी टोली जशपुर की श्रीमती बसंती बड़ाईक और उनकी बेटी परिधि बड़ाईक, श्रीमती पुष्पा चैहान और नैन्सी चैहान और दुर्ग जिले के अखरा पाटन गांव की श्रीमती कामिनी कंडरा और उनके बेटे सुशील कंडरा, श्रीमती भीष्मा ठाकुर और उनकी बेटी याचना ठाकुर से बात कर गतिविधियों की जानकारी ली।

आंगनबाड़ी कार्यकर्ता घर-घर जाकर इन कार्यक्रमों के बारे में अभिभावकों को करेंगी जागरूक

महिला बाल विकास मंत्री श्रीमती अनिला भेंड़िया ने बताया कि चकमक अभियान बच्चों के लिए अभिव्यक्ति का एक महत्वपूर्ण मंच है, पूरे परिवार के साथ मिलकर हंसी-खुशी से सीखने-सिखाने का अवसर है। सजग कार्यक्रम में कार्यकर्ताओं के मोबाइल पर आॅडियो मैसेज में बच्चों के सही परवरिश के सुझाव, गतिविधियां संबंधी कहानी, गीत भेजे जा रहे हैं।

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